उत्तर प्रदेश में कृषि कानूनों को लेकर चले विवाद के बाद यह सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या इससे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का किसान आधार कमजोर पड़ा। इसी संदर्भ में moneycontrol.com की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि यूपी के 2022 और 2024 के चुनावी आंकड़े इस मुद्दे पर एक “चौंकाने वाली” कहानी बताते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि कानूनों के प्रभाव को लेकर बनी धारणा के बीच, उत्तर प्रदेश के 2022 और 2024 के चुनाव परिणामों/आंकड़ों को सामने रखकर यह आकलन किया गया है कि किसान वोट-बेस के टूटने या बने रहने की वास्तविक स्थिति क्या दिखती है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि आगामी चुनावी परिदृश्य से पहले यूपी के ये आंकड़े इस बहस को नए सिरे से देखने को मजबूर करते हैं—यानी केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि चुनावी संख्याओं के संकेतों के आधार पर।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का फोकस इस बात पर है कि कृषि कानूनों के बाद बीजेपी के किसान समर्थन को लेकर जो चर्चा चलती रही, उसे यूपी के 2022 और 2024 के चुनावी आंकड़े किस तरह “सरप्राइज़िंग” तरीके से चुनौती देते या अलग तस्वीर पेश करते हैं।
Source: moneycontrol.com